प्रेगनेंसी ब्लड टेस्ट कब करना चाहिए: पेट में ना मरे बच्‍चा और ना हो कोई जन्‍मजात बीमारी, पहले तीन महीनों में करवा लें ये ब्‍लड टेस्‍ट – required blood tests during pregnancy first trimester in hindi

​आयरन और ब्‍लड शुगर लेवल

हीमोग्‍लोबिन लेवल चैक करने के लिए ब्‍लड टेस्‍ट किया जाता है जिससे कि पता चलता है कि शरीर में आयरन की कमी है या नहीं। गर्भावस्‍था के दौरान शरीर में पर्याप्‍त आयरन होना जरूरी होता है जिससे शरीर के सभी हिस्‍सों और शिशु को ऑक्‍सीजन मिल सके। ब्‍लड टेस्‍ट से आयरन की कमी का पता चलता है और डॉक्‍टर इस कमी को पूरा करने के लिए आयरन सप्‍लीमेंट देते हैं।

इसके अलावा ब्‍लड टेस्‍ट की मदद से खून में शुगर की मात्रा यानि ब्‍लड शुगर लेवल भी चैक किया जाता है। इससे जेस्‍टेशनल डायबिटीज का भी पता चलता है।

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हेपेटाइटिस बी और एचआईवी

ब्‍लड टेस्‍ट से डॉक्‍टर हेपेटाइटिस बी का पता लगाते हैं। अगर बच्‍चे को मां से हेपेटाइटिस बी हो जाए इसकी वजह से शिशु के लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इस स्थिति में बच्‍चे को हेपेटाइटिस बी से बचाने के लिए डॉक्‍टर प्रेगनेंट महिला को एंटीबॉडीज का इंजेक्‍शन लगाते हैं।

सभी गर्भवती महिलाओं को एचआईवी और एड्स का टेस्‍ट भी जरूर करवाना चाहिए। अगर मां को एचआईवी या एड्स है तो ट्रीटमेंट की मदद से शिशु तक इस बीमारी को पहुंचने से रोका जाता है।

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​थायराइड और रूबैला टेस्‍ट

गर्भावस्‍था की पहली तिमाही में डॉक्‍टर थायराइड लेवल की जांच करते हैं। अगर आपको हाइपोथायराइड या हाइपरथायराइड है तो प्रेग्‍नेंसी के दौरान मां को मॉनिटर किया जाता है ताकि शिशु के विकास पर कोई असर ना पड़े।

इसके अलावा प्रेगनेंट महिला को रूबैला टेस्‍ट भी करवा लेना चाहिए। यदि गर्भवती महिला को रूबैला हो जाए तो इससे बच्‍चे के दिल, आंखों और सुनने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।

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​अन्‍य ब्‍लड टेस्‍ट

सिकेल सेल डिजीज या थैलीसीमिया का टेस्‍ट भी प्रेग्‍नेंसी के पहले तीन महीनों में किया जाना चाहिए। सिकेल सेल डिस्‍ऑर्डर और थैलीसीमिया दो प्रकार के खून की कोशिकाओं से संबंधित विकार हैं जिसकी वजह से एनीमिया हो जाता है और यह शिशु तक भी पहुंच सकता है।

इसके अलावा टोक्‍सोप्‍लास्‍मोसिस इंफेक्‍शन भी पहली तिमाही में मां के जरिए बच्‍चे तक पहुंच सकता है। इससे बच्‍चे का कोई अंग डैमेज हो सकता है, मिसकैरेज या स्टिलबर्थ भी हो सकता है।

प्रेग्‍नेंसी में विटामिन डी की कमी की वजह से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं या शिशु के विकास में दिक्‍कत आ सकती है और मां में भी प्रीक्‍लैंप्‍सिया का खतरा बढ़ जाता है। प्रेग्‍नेंसी की पहली तिमाही में विटामिन डी का लेवल चेक करने के लिए भी टेस्‍ट किया जाना जरूरी है।

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