estrogen during pregnancy chart: Estrogen hormone : प्रेगनेंसी के 9 महीने पूरे करने के लिए बहुत जरूरी है एस्‍ट्रोजन हार्मोन – estrogen during pregnancy role in hindi

प्रेगनेंसी हार्मोंस में उतार चढ़ाव की वजह से प्रेगनेंट महिला को कई तरह की परेशानियां उठानी पड़ती हैं और आपको बता दें कि इसमें अहम भूमिका निभाने वाला एक हार्मोन एस्‍ट्रोजन भी है। यह हार्मोन मां की सेहत और शिशु के विकास में बहुत अहम भूमिका निभाता है।
तो चलिए जानते हैं एस्‍ट्रोजन हार्मोन, यह क्‍या काम करता है और प्रेगनेंसी में इसके महत्‍व के बारे में।

क्‍या है एस्‍ट्रोजन हार्मोन
मानव शरीर में कई हार्मोन हैं जो शरीर के विकास और सामान्‍य क्रियाओं में मदद करते हैं। टेस्‍टेस्‍टेरोन और एस्‍ट्रोजन जेंडर प्रधान हार्मोंस हैं, मतलब कि पुरुषों में टेस्‍टेस्‍टेरोन प्रमुख होता है और महिलाओं में एस्‍ट्रोजन।
आमतौर पर एस्‍ट्रोजन महिलाओं में प्‍लेसेंटा और ओवरी में बनता है। एस्‍ट्रोजन का सबसे महत्‍वपूर्ण रूप महिला के शरीर से बनने वाला एस्‍ट्राडिओल है। यहां तक कि शिशु के विकास के लिए इसे सबसे जरूरी हार्मोन कहा जा सकता है। यह हार्मोन महिलाओं को कंसीव करने में मदद करता है और उसके बाद मिसकैरेज से बचाने में अहम भूमिका निभाता है।

प्रेगनेंसी में एस्‍ट्रोजन लेवल लो होना
एस्‍ट्रोजन हार्मोन का लेवल कम होने से पूरी प्रेगनेंसी पर असर पड़ता है और खासतौर पर गर्भ में पल रही गर्ल चाइल्‍ड इससे अधिक प्रभावित होती हैं। लो एस्‍ट्रोजन लेवल की वजह से मिसकैरेज, गर्भ में पल रही बच्‍ची का किसी फर्टिलिटी समस्‍या के साथ पैदा होना या उसकी ओवरी में एग कम होने की दिक्‍कत हो सकती है।

गर्भावस्‍था में कितना होना चाहिए एस्‍ट्रोजन लेवल
प्रेगनेंसी के नौ महीनों में हार्मोंस में उतार चढ़ाव आता रहता है और एस्‍ट्रोजन का स्‍तर भी बदलता रहता है। गर्भावस्‍था की पहली तिमाही में एस्‍ट्रोजन 187-2498 पीजी/मिली होता है, गर्भावस्‍था की दूसरी तिमाही में यह स्‍तर 1276-7193 पीजी/मिली होता है। वहीं, प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में यह लेवल 6138-3461 पीजी/मिली होता है।

गर्भावस्‍था में क्‍या काम करता है एस्‍ट्रोजन
एस्‍ट्रोजन एक प्रमुख हार्मोन है जिसमें एस्‍ट्राडिओल जैसे कई हार्मोन होते हैं। इस हार्मोन की मदद से गर्भपात का खतरा कम होता है और महिलाएं अपनी नौ महीने की प्रेगनेंसी को पूरा कर पाती हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड मेडिकल सेंटर की स्‍टडी में सामने आया है कि जिन प्रेगनेंट महिलाओं में एस्‍ट्रोजन का लेवल कम है, उनके बच्‍चे में फर्टिलिटी समस्‍या हो सकती है। वहीं, इसी स्‍टडी में पता चला कि अधिक एस्‍ट्रोजन की वजह से अन्‍य फर्टिलिटी समस्‍या हो सकती है और गर्भपात भी हो सकता है।
एस्‍ट्रोजन लेवल से शिशु भी ठीक रहता है और आगे चलकर वह खुद अपना बच्‍चा कर पाने में सक्षम होता है। एस्‍ट्रोजन हार्मोन भ्रूण को स्‍वस्‍थ शिशु बनने के लिए पोषण देने में बहुत अहम भूमिका निभाता है। इससे बच्‍चे को पोषण मिलता है। वहीं, प्रेगनेंसी में एस्‍ट्रोजन कम होने पर भ्रूण में कुपोषण हो सकता है।
शरीर में एस्‍ट्रोजन लेवल की कमी की जांच के लिए डॉक्‍टर एक ब्‍लड टेस्‍ट करवाते हैं और उसमें एस्‍ट्रोजन के तत्‍व एस्ट्रिओल और अल्‍फा फेटोप्रोटीन या एएफपी की जांच की जाती है। इसके अलावा एचसीजी (ह्यूमन कोरिओनिक गोनाडोट्रोपिन) का भी टेस्‍ट करवाते हैं।

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