Forceps Ventouse Delivery Benefits and Risks : जानिए क्या होती है फोरसेप्स डिलीवरी और कब पड़ती है इसकी जरूरत

फोरसेप्‍स डिलीवरी (forceps delivery) तब की जाती है जब महिला को लेबर पेन शुरू नहीं होता है। फोरसेप्स एक तरह का मेडिकल उपकरण है, जिसकी मदद से शिशु को धीरे-धीरे बर्थ कनाल यानी जन्म नलिका से बाहर निकाला जाता है। इस तकनीक का इस्तेमाल डाॅक्टर तब करते हैं जब जल्द से जल्द बच्चे को जन्म देने की जरूरत पड़ती है।

​कब करते हैं फोरसेप्स डिलीवरी

  • जब मां बच्चे को जन्म देने की प्रक्रिया में काफी थक जाती है। ऐसा लेबर के स्टेज 2 में होता है।
  • थकान भरी प्रक्रिया के बाद मां की क्षमता कम हो जाती है।
  • गर्भ में पल रहे भ्रूण की पोजीशन सही न होना।
  • जब बच्चे की अवस्था गर्भ में सही न हो तब डिलीवरी के समय एक रोटेशनल इंस्ट्रूमेंट की जरूरत होती है।

फोरसेप्स डिलीवरी के पहले डाॅक्टर पहले प्रीलिमिनरी पेल्विक एग्जामिनेशन करते हैं। इसमें डाॅक्टर निम्न चीजों का चेकअप करते हैं-

  • बच्चे की पोजीशन
  • सर्विकल डायलेशन

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​फोरसेप्स डिलीवरी के दौरान

  • मूत्राशय को खाली करने के लिए मूत्रमार्ग के जरिए पतली कैथेटर डाली जाती है।
  • इसके बाद डाॅक्टर योनि को सुन्न करते हैं। इसके लिए दर्द निवारक इंजेक्शन देते हैं।
  • इस प्रक्रिया के दौरान शिशु के दिल की धड़कनों पर नजर रखी जाती है।
  • योनि खोलने के लिए डाॅक्टर एपिसिओटाॅमी करते हैं।
  • बहुत ही सावधानी से और धीरे-धीरे फोरसेप्स को बच्चे के सिर से लगाया जाता है।
  • फोरसेप्स के जरिए डाॅक्टर बच्चे को निकालते हैं और मां को कहा जाता है कि प्रेशर लगाती रहे ताकि बच्चा आसानी से निकल सके।
  • अगर बच्चे की पोजीशन सही न हो तो डाॅक्टर फोरसेप्स की मदद से उसकी पोजीशन को सही करते हैं।
  • ध्‍यान दें कि अगर फोरसेप्स का इस्तेमाल करने के बावजूद डिलीवरी नहीं हो पाती है तब डाॅक्टर सी-सेक्शन की सलाह देते हैं।

​प्रक्रिया के बाद

फोरसेप्स डिलीवरी के दौरान डाॅक्टर बच्चे की अच्छी तरह जांच-पड़ताल करते हैं। उसे कहीं चोट या जख्म न लगे, इसका भी ध्यान रखा जाता है।

फोरसेप्स डिलीवरी के बाद मां कई दिनों तक असहज महसूस कर सकती है या फिर उन्हें दर्द हो सकता है। यदि दर्द बहुत ज्यादा है और असहनीय है तो डाॅक्टर से संपर्क करें।

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​फोरसेप्स डिलीवरी के जोखिम

फोरसेप्स डिलीवरी में मां और शिशु दोनों को कई तरह के रिस्क हो सकते हैं जैसे –

  • योनि और गुदा के बीच मौजूद स्किन (जिसे पेरिनम कहते हैं) में दर्द।
  • पेशाब करने में दिक्कत।
  • पेशाब और मल रोक पाने में दिक्‍कत।
  • काफी ज्यादा खून बहने के कारण एनीमिया।
  • मूत्रमार्ग और मूत्राशय में चोट।
  • पेल्विक ऑर्गन को सपोर्ट करने वाली मांसपेशियों और लिगामेंट में कमजोरी।

बच्चे में फोरसेप्स डिलीवरी के जोखिमों में चेहरे पर हल्की चोट लगना, चेहरे की मांसपेशियों में कमजोरी आना, स्कल फ्रेक्चर या अंदरूनी ब्लीडिंग होना और बच्चे के चेहरे पर दाग जो कि दो से तीन दिन तक रहना शामिल है।

प्रेगनेंट महिला को पहले से ही ये नहीं बताया जा सकता है कि उनकी फोरसेप्‍स डिलीवरी होगी। प्रसव के समय महिला की स्थिति और बच्‍चे की पोजीशन के हिसाब से ही फोरसेप्‍स डिलीवरी की सलाह दी जाती है।

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