pregnancy me malish kaise kare: प्रेग्‍नेंसी के किस हफ्ते से शुरू करनी चाहिए नीचे के हिस्‍से की मालिश ताकि बच्‍चा और मां रहें स्वस्थ – when to start perineal massage in pregnancy in hindi

​क्या है पेरिनियम

योनि और गुदा के बीच एक बेहद नाजुक हिस्सा है, जिसे पेरिनियम कहा जाता है। नाॅर्मल डिलीवरी के दौरान इस हिस्से में कट लगाया जाता है ताकि बच्चा बर्थ कनाल से आसानी से दबाव बनाते हुए बाहर निकल सके।

यदि यह कट छोटा लगा है, तो आसानी से ठीक हो जाता है। लेकिन बड़ा कट ठीक होने में समय लेता है। खासकर पहली बार बनी मां के लिए यह दर्दनाक अहसास हो सकता है।

​पेरिनियल मसाज क्या है

डिलीवरी के दौरान पेरिनियम टिश्यू का रिलैक्स होना जरूरी है ताकि सहजता से बच्चा बाहर आ सके। मसाज की मदद से इस हिस्से को स्ट्रेच किया जाता है जो कि जन्म के दौरान बच्चे के निकलने के लिए सहज रास्ता तैयार करता है और डिलीवरी के समय कट लगने की गुंजाइश को कम करता है।

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​किस हफ्ते शुरू करनी चाहिए पेरिनियल मसाज

गर्भावस्था के 34वें सप्ताह से पेरिनियल मसाज की शुरुआत करनी चाहिए। लेकिन मसाज करवाने से पहले आपको ध्यान रखना होगा कि आप सहज महसूस कर रही हैं।

असहज होने पर यह मसाज न करवाएं। आप पेरिनियल मसाज खुद कर सकती हैं या फिर अपने पार्टनर से करवा सकती हैं।

​पेरिनियल मसाज करवाने के फायदे

पेरिनियल मसाज इसलिए की जाती है ताकि डिलीवरी के दौरान महिला को दर्द कम हो। यदि आप समय से और डिलीवरी के पहले तक पेरिनियल मसाज करवाती हैं, तो आपको निम्न फायदे मिल सकते हैं जैसे-

  • यह मसाज पेरिनियम में लचीलापन पैदा करती है, जिससे बच्चे के जन्म के दौरान मां को कम दर्द होता है। पेरिनियल टिश्यू में आया लचीलापन मांसपेशियों में भी दर्द का अहसास कम करता है।
  • इस मसाज से पेरिनियम और मुलायम हो जाता है और इसका लचीलापन भी बढ़ता है। यही कारण है कि डिलीवरी के दौरान यदि महिला को कट लगता है, तो उसकी रिकवरी तेजी से होती है।
  • इस हिस्से की मसाज करने से रक्त संचार बेहतर होता है।
  • यह डिलीवरी के दौरान पेरिनियम को खोलने में मदद करता है।
  • यह एपीसीओटॉमी की आवश्यकता को कम करता है।
  • पेरिनियल मसाज के कारण डिलीवरी के दौरान अन्य विकल्पों को आजमाने की गुंजाइश कम हो जाती है जैसे कि फारसेप्स या वैक्यूम की मदद से की जाने वाली डिलीवरी।

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​सख्त टिश्यू को नरम करने में मदद करता है।

लाॅस एंजेलिस के यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में हुए अध्ययन से पता चलता है कि पेरिनियम मसाज उस एक बिंदू पर दबाव बनाता है, जो कि कब्ज की शिकायत को कम कर सकता है।

इसलिए गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं को बवासीर होता है, उन्हें यह मसाज जरूर करवानी चाहिए। इससे गर्भावस्था में हुए बवासीर से महिला को आराम मिलता है।

पेरिनियल मसाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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