Drivers with poor eyesight have 81 percent road crash involvement rate says Mission for Vision survey | देश में 40% ड्राइवर्स के आंखों की रोशनी ठीक नहीं, यह 81% तक रोड एक्सीडेंट की वजह बन सकती है, 12 राज्यों के 15 हजार ड्राइवर्स पर हुआ सर्वे

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एक घंटा पहले

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  • ब्लाइंडनेस के लिए काम करने वाले एनजीओ ‘मिशन फॉर विजन’ का सर्वे
  • 68% ट्रक ड्राइवर्स ने कभी आंखों की जांच नहीं कराई, इनमें से 60% को चश्मे की जरूरत

ड्राइवर की आंखों की रोशनी कमजोर होती है तो एक्सीडेंट का खतरा ज्यादा होता है। देश के 12 राज्यों में 15 हजार ड्राइवर्स पर हुआ सर्वे यही कहता है। एनजीओ ‘मिशन फॉर विजन’ के एक सर्वे के मुताबिक, देश में 40 फीसदी ड्राइवर्स की आंखों की रोशनी ठीक नहीं। यह 81 फीसदी तक रोड एक्सीडेंट की वजह बन सकता है।

देश में आंखों की रोशनी और ड्राइविंग के बीच कनेक्शन को समझाने के लिए हाल ही में एनजीओ की ओर से वर्चुअल इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें आंखों के जुड़े अलग-अलग संस्थानों ने अपनी राय रखी। एनजीओ के डेवलपमेंट हेड सबित्रा कुंडू कहते हैं, यह सर्वे 2019 से 2020 के बीच किया गया है। यह एनजीओ देश में ब्लाइंडनेस खत्म करने के लिए काम करने के लिए काम करता है।

68 % ट्रक ड्राइवर्स ने कभी आंखों की जांच नहीं कराई
कॉन्फ्रेंस में विजन स्प्रिंग (इंडिया) के डायरेक्टर अंशू तनेजा ने कहा, देश में रोड एक्सीडेंट के मामलों में आंखों की रोशनी कम होने का बड़ा रोल है। हमने इसे समझने के लिए एक अलग स्टडी की। इसमें देश के 30 हजार ट्रक ड्राइवर्स को शामिल किया। रिसर्च में सामने आया कि 68 फीसदी ट्रक ड्राइवर्स ने कभी आंखों की जांच नहीं कराई। इनमें से 60 फीसदी को चश्मे की जरूरत थी।

देश में 80% सड़क हादसे की वजह आई प्रॉब्लम
अंशू तनेजा कहते हैं, देश में सड़कों पर होने वाली 80 फीसदी मौतों की वजह आई प्रॉब्लम्स हैं। इनमें भी 26 फीसदी तक कॉमर्शियल वाहनों को चलाने वाले ड्राइवर शामिल हैं। हर चार में से एक ड्राइवर 20 से 30 मीटर की दूरी पर बना साइनबोर्ड नहीं देख पाता। ड्राइवर्स के आंखों की जांच अनिवार्य तौर पर की जानी चाहिए।

2018 में 10.35 लाख लोगों की मौत रोड एक्सीडेंट में हुई
विजन इम्पैक्ट इंस्टीट्यूट के मैनेजर क्रिस्टन ग्रॉस कहते हैं, 2018 में दुनियाभर में 10.35 लाख लोगों की मौत रोड एक्सीडेंट में हुई और 5 करोड़ लोग घायल हुए। इनमें 90 फीसदी निम्न और मध्यम आय वाले देशों से थे। 11 फीसदी भारत से थे। रोड ट्रैफिक एक्सीडेंट में सबसे ज्यादा मौत 15 से 29 साल वालों की हुई।

दुनियाभर के 1 फीसदी वाहन भारत में

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट कहती है, दुनिया में जितने भी वाहन हैं, उसका 1 फीसदी भारत में हैं। दुनियाभर में होने वाले रोड एक्सीडेंट के 6 फीसदी मामले भारत में सामने आते हैं। बेंगलुरू के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की एक रिसर्च कहती है, देश में 81 फीसदी ड्राइवर्स में आंखों से जुड़ी कोई न कोई एक समस्या जरूर होती है। इनमें 30 फीसदी ड्राइवर इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ ऑप्थेल्मोलॉजिस्ट की सेफ्टी गाइडलाइन का पालन नहीं करते।

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