new coronavirus strain india: New Coronavirus Strain: COVID के नए और पुराने स्ट्रेन में क्या है अंतर? कितने अलग हैं इनके लक्षण? – coronavirus india wondering what is the difference between the new and old coronavirus strain

नए वैरिएन्ट के लिए बढ़ी हुई संख्या की अटकलों से हम अब भी संभावित लक्षणों के बारे में बहुत कुछ ऐसा है, जो हम म्यूटेंट वैरिएन्ट के बारे में नहीं जानते हैं। अपने देश भारत में इन्फेक्शन की यह दूसरी लहर पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकती है, जो हेल्थ केयर सिस्टम को तोड़ने के कगार पर पहुंचा सकती है।

यहां मामले बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि नए COVID के म्यूटेशन भारत में सिर्फ डर नहीं पैदा कर रहे हैं, बल्कि एक साथ पूरी दुनिया में फैल सकते हैं, और केवल कुछ ही प्रतिशत में उनकी पहुंच COVID वैक्सीन तक है। (फोटो साभार: BCCL images)

​पुराना बनाम नया COVID वैरिएन्ट: क्या है अंतर?

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वायरस और अन्य पैथोजेंस को प्रकृति से म्यूटेट करने और अलग करने के लिए जाना जाता रहा है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, एक वायरस अपनी ही प्रतिकृति बनाता है या अपनी कई कॉपीज बनाता है, जो सामान्य बात है। इन बदलावों को ‘म्यूटेशन’ कहा जाता है। किसी वायरस के एक या अधिक म्यूटेशन्स को असली वायरस का वैरिएन्ट (संस्करण) कहा जाता है।

म्यूटेशन्स में जीनोमिक सीक्वेंसिंग भी हो सकती है, जो उन्हें अधिक गहराई से हेल्दी सेल्स को पार करने या अटैच करने की अनुमति दे सकता है। सबसे अधिक जोखिम वाले तीन मुख्य इनफेमस COVID वैरिएन्ट केंट, यूके ( B।1।1।7 वैरिएन्ट), दक्षिण अफ्रीका (B।1।351 वैरिएन्ट) और ब्राजील (B।1।1।28।1 or P।1 वैरिएन्ट) से निकले हैं, जो असली वायरस स्ट्रेन के वैरिएशन्स हैं।

हालांकि, एक डबल म्यूटेशन तब उभरता है, जब एक वायरस स्ट्रेन के के दो म्यूटेशन मिलकर तीसरे सुपर संक्रमित स्ट्रेन को बनाते हैं। डबल म्यूटेंट वैरिएन्ट, जिसे सबसे पहले महाराष्ट्र राज्य में पहचाना गया, उसे E484Q और L452R म्यूटेशन्स के बीच का क्रॉस माना जा रहा है। जबकि E484Q म्यूटेशन घरेलू है, L452Rको अमेरिका से आया गया बताया जा रहा है।
(फोटो साभार: istock by getty images)

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​क्या नए वैरिएन्ट्स में अलग- अलग लक्षण हैं?

COVID- 19 के कारण होने वालेवायरस के संकेतों और लक्षणों में खांसी, बुखार, दर्द और मुख्य तौर पर गंध का गायब हो जाना शामिल है। हालांकि, जैसा कि नए म्यूटेशन्स पर ध्यान दिया जा रहा है, कई लोगों को संदेह है कि वायरस हमारी बॉडी पर हमला करने के मामले में पहले से ज्यादा स्मार्ट हो चुका है।

उदाहरण के लिए, कुछ स्टडीज ने स्थापित किया है कि वायरस जल्दी से कुछ वाइटल ऑर्गेन्स के साथ इम्यून डिफेन्स से बच सकता है और अधिक प्रभावशाली तरीके से हमला कर सकता है। असल स्ट्रेन के साथ बुखार जरूरी नहीं था लेकिन नए म्यूटेशन के लिए पॉजिटिव टेस्ट किए गए मामलों के लक्षण अधिक गंभीर हैं। कुछ अन्य लक्षण जैसे सुनने में दिक्कत, मांसपेशियों में दर्द, स्किन इन्फेक्शन और ठीक से ना दिखाई देना नए स्ट्रेन के साथ सामान्य हैं, जो गंभीर हैं।

डबल म्यूटेंट वायरस पर वैज्ञानिक अभी भी स्टडी कर रहे हैं। फिर भी, कई लोगों का मानना है कि इसके यूके के वैरिएन्ट की तुलना में अधिक संक्रामक होने की आशंका है। इसके लक्षण अधिक गंभीर हैं या नहीं, यह भी अनिश्चित है। मास्क पहनना और पूरी तरह से सावधान रहना ही अपने आपको पूरी तरह से सुरक्षित रखने का एकमात्र तरीका है।

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​क्या यह अधिक संक्रामक है?

संक्रामक होने का मतलब पैथोजेन का इन्फेक्शन या लक्षण पैदा करने से है, जबकि ट्रांसमिशन का मतलब यह है कि एक संक्रामक व्यक्ति कितनी आसानी से इन्फेक्शन को दूसरे में फैला सकता है।

SARS-COV-2 वायरस को काफी संक्रामक माना जाता है। फिर से आना और हाई पॉजिटिविटी रेट को देखकर, इस समय यह अनुमान लगाया है कि वायरस का नया वैरिएन्ट अधिक संक्रामक है और कई लक्षण पैदा कर सकता है। फिर से, कुछ क्लिनिकल रिसर्च कहते हैं कि म्यूटेशन्स बहुत गंभीरता का कारण नहीं बन सकते हैं, लेकिन शोधकर्ताओं के अनुसार इनमें से कुछ म्यूटेशन्स कोरोना वायरस को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक तेजी से फैलाने में सक्षम हो सकते हैं। अधिक संक्रमण के परिणामस्वरूप ज्यादा लोग बहुत बीमार हो सकते हैं या उनकी मृत्यु हो सकती है।

ऐसे में, अथॉरिटी को नए स्ट्रेन्स और म्यूटेशन्स के प्रभावों को ठीक से पता लगाने और उनसे जुड़ी ट्रांसमिशन की क्षमता को मैप करने की जरूरत होगी।

​नए वैरिएन्ट से आपको फिर हो सकता है इन्फेक्शन

SARS-COV-2 के नए वैरिएन्ट कई मायनों में बहुत स्मार्ट हैं। चूंकि इम्यून डिफेन्स और एंटीबॉडीज को को पार करने में इनकी पकड़ बेहतर हो सकती है, इसलिए यह माना जाता है कि भविष्य में इन्फेक्शन से सुरक्षा के लिए प्राकृतिक एंटीबॉडीज (COVID के बाद) पूरी तरह से काम नहीं कर सकते हैं, यदि आप नए म्यूटेशन्स के संपर्क में हैं।

उदाहरण के लिए, वायरस का केंट वैरिएन्ट विशेष तौर पर री- इन्फेक्शन के जोखिम को बढ़ाने के लिए ख़बरों में रहा है। नए स्टडीज भी यह बताते हैं कि कॉमोरबिटीज के साथ वरिष्ठ नागरिकों, जिनकी उम्र 55 से ज्यादा है, को इन्फेक्शन होने का खतरा एक बार से अधिक का है।

भारत में डबल म्यूटेशन के लोगों के दूसरी बार पॉजिटिव होने के मामलों की संख्या को बढ़ा रहा है, इस पर अभी रिसर्च होना बाकी है। हालांकि, कम होता इम्यून, जो उन लोगों के लिए हो सकता है जिन्हें पहले से बीमारियां हैं, शरीर के लिए डबल म्यूटेशन के खिलाफ एक कठिन मोर्चा खड़ा कर सकता है। कम और कमजोर इम्युनिटी संक्रमित पैथोजेंस को बॉडी पर अटैक करने के लिए आसान बनाती है और समस्याएं खड़ी करती हैं।

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​यह वैक्सिनेशन ड्राइव को कैसे करेगा प्रभावित?

कुछ लोग अभी भी अपनी COVID वैक्सीन लेने के बाद भी पॉजिटिव हो रहे हैं। हालांकि, यह असामान्य घटना नहीं है, बावजूद इसके कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यहां म्यूटेंट वैरिएन्ट की भूमिका हो सकती है।

अभी तक दुनिया में ज्यादातर वैक्सीन का इस्तेमाल प्रायोगिक तौर पर किया गया है, हमारे पास ज्यादा सबूत नहीं हैं कि वे शातिर वैरिएन्ट्स के खिलाफ़ पूरी तरह से कुशल होंगे। इसका मतलब है कि संपर्क की स्थिति में वायरस को निकलने और एंटीबॉडीज से बचने का एक आसान रास्ता मिल सकता है और वह इन्फेक्शन उत्पन्न कर सकता है।

​हमें अभी से सावधान रहने की जरूरत है

अभी तक इस बारे में अध्ययन करना बाकी है कि यह असल स्ट्रेन की तरह गंभीर इन्फेक्शन का कारण बन सकता है या नहीं। लेकिन, फिर भी जिन लोगों ने अपना वैक्सीनेशन ले लिया है, और वे COVID पॉजिटिव हो गए हैं, उन मामलों में यह काम आ सकता है।

जिन लोगों को दोनों वैक्सीन नहीं मिला है, वे भी जोखिम में हैं। अधूरी वैक्सीन प्रभावशीलता और COVID प्रोटोकॉल के खराब अनुपालन के कारण मामले बढ़ सकते हैं और हो सकता है कि वैक्सीन मिलने के लेने बाद भी आपको इन्फेक्शन हो जाए।

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